Internet पीढ़ी ही रचेगी नया इतिहास ( जरुर पढ़ें )

इतिहास में  जिस  किसी मोड़ पर मानव सभ्यता को अपने अस्तित्व के लिए एक नई दिशा कि जरुरत पड़ी, तो यह युवा पीढ़ी ही है, जिसने बदलाव का बीड़ा उठाया. बतौर युवा इंसान में दो तरह के खास गुण होते है. पहला:- उसमें इतना ना अधिक अस्फुर्ती और ऊर्जा होती है.कि वह कुछ नया कर दिखाते है. और दूसरा:- जीवन में उसे इतनी ठोकरे नहीं मिली होती कि वह निराश हो जाए और अपना प्रयास करना छोड़ दें.

इसका अर्थ यह है कि युवा पीढ़ी सकरात्मक ऊर्जा व सोच कि धनी होती है. यही गुण इनको बदलाव का वाहक बनाता है. इन्ही खासियत कि वजह से विश्व में जब भी किसी क्रांति या बदलाव कि जरुरत आन पड़ी, तो युवाओं ने ही आगे बढ़कर मोर्चा संभाला. आज दुनिया का कोई देश बीते कल को पीछे छोड़कर नै ऊर्जा के साथ वर्तमान गुजार रहा है, तो इसका श्रेणी युवा पीढ़ी को जाता है. उनकी अस्फुर्ती और कार्य करने कि सदिच्छा को सही मौका मिलें, तो यह काफी कुछ अच्छा कर जाती है, पर जब-जब इसे गलत दिशा मिली है तो यह विनाशकारी साबित हुई है.

आज भारत इस मुकाम पर खड़ा है कि युवा शक्ति बीते साथ दशकों या आजादी के समय के तमाम सपनों को सच कर के दिखा सकती है. बस इन्हें सही रास्ता दिखाना होगा, वरना हम अपना सुनहरा भविष्य गवाँ सकते है. आज युवा ताकत के मामले में हम भारतवाशी दुनिया में सबसे आगे है. यह मौका फिर हमें कभी नहीं मिलेगा.
लिहाजा हमें युवा शक्ति को सही रह बतानी होगी.

इसमें कोई दोराय नहीं कि भारत का युवा ना सिर्फ करात्मक सोच रखते है, बल्कि मेहनती भी है और अनवरत काम में विश्वास करता है. सामाजिक कार्यो में यह बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहा है. आलम यह है कि Engineering, Medical जैसे Professional Course करने वाले युवा भी सामाजिक कार्यो के तरह स्वयं सेवक बनकर गांवों की सेवा कर रहें है, जो साबित करता है कि युवा Country के लिए कुछ करना चाहता है.

हालाँकि दो मोर्चे पर हमारी कमजोरी भी दिखती है. पहली और बड़ी कमजोरी:- युवाओं में मौजूद उतावलापन है. उन्हें अनुभव कमाने और धैर्य रखने कि जरुरत है. असल में हमारी, पिछले कुछ वर्षो में यह पीढ़ी “Internet जेनरेशन” में बदल गई है. धैर्य रखना हमारी युवा भूलते जा रहें है. यह उन्हें समझने कि जरुरत है कि किसी लंबे कार्य को करने के लिए लंबे वक्त कि दरकार होती है. हमें अपने Life में उस Time को खर्च करना होगा, तभी सफलता कदम चूमेगी. यह बात तो ठीक वैसा ही है जैसे किसी भी House को अच्छी तरीके से नहीं बनाया जाएँ तो वह टूटने लगता है.

Internet पीढ़ी सब कुछ तेज करने में विश्वास रखती है, इसलिए उनका सब्र खोना हमारें देश के लिए बहुत बड़ा नुकशान पहुँचा सकता है. अगर इंतजार का धैर्य नहीं होगा तो युवा निराश हो सकते है और जो वो करना  चाहते है वो कतई नहीं कर पाएँगे. अगली किसी भी पहल कि तो वो सोच भी नहीं सकते. युवाओं में निराशा बढ़ने पर कई पीढ़ी इससे प्रभावित होती है. कई लोगों कि ऊर्जा कि श्रोत यही युवा ताकत होती है. अगर यह चाह जाएँ कि हमें यह काम करना है तो वो जरुर कर पाएँगे.

आजादी हासिल करने में हमें 90 साल लग गएँ, जबकि पहली बार 1857 में पहली बार हमनें ब्रिटिश सरकार के खिलाप पहली जंग छेड़ दी थी. एक और तथ्य युवा भूल जाते है कि हमसे पहली वाली पीढ़ी ने भी कुछ करने कि कोशिश की थी. उनके प्रयासों को बेकार समझने कि कोशिश मत करें. कुछ नया वो तभी कर पाएँगे जब कुछ पुरानी गलतियाँ या सफलता को देख कर नए जगहों पर कदम रखेंगे. बड़े-बुजुर्गो की उपलब्धियाँ को नकार कर अपनी ऊर्जा फिर से उसी कम में खर्च करना उचित नही???

अनुभव मूल्यवान है. New Idea का सीजन तभी होगा जब अनुभव से सिखा जाएँ एवम उसका बारीक़ विशलेषण किया जाएँ. सिखने कि मानसिकता रहने पर ही युवा कुछ नया कर सकते है. उन्हें अति आत्मविश्वास से बचना चाहिए.

अगर ऐसा संभव हो सका, तो निश्चय ही हमारी युवा पीढ़ी कुछ नया कर सकते है. युवाओं के पास ऊर्जा है, सकरात्मक सोच है और अपनी इच्छा सकती है कि वो देश को नई ऊँचाई पर लें जा सकते है. आज ऐसे-ऐसे Schooly Project दिख रहें है, जो बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को भी दांतों तले उँगलियाँ दवाने को मजबूर कर देते है. जाहिर है हमारें यहाँ प्रतिभा कि कोई कमी नहीं है बस जरुरत है, तो उसे दिशा देने और उसका नजरिया दुरुस्त करने की.

आवश्यकता भारतीयता की पहचान भी अपनाने कि है. नहीं भूलना चाहिय कि हम सब Indian है और ताउम्र हमारी पहचान भारत से ही जुडी रहेगी. एक उदाहरण के तौर पर बतलाता हूँ कि:- दक्षिण प्रशांत महासागर में एक फिजी देश है यहाँ 200 से 300 Years पहले Indian Man गएँ थें. मगर आज भी वहाँ उन्हें Indian कह कर ही पुकारा जाता है. फिजी देश में अब तक उनकी भारतीयता कि पहचान ख़त्म नहीं हो पाईं है.

 इसलिए हमेशा पहचान को गर्व से जोड़ने की कोशिश करें. इसे नया स्वरूप मिलना चाहिए. हमारी पीढ़ी ऐसा कर चुकी है तभी आज दुनिया भर में India का गुणगान किया जाता है. आज के युवाओं को इसे और बेहतर बनाना होगा, उन्हें यह समझना होगा भारतीयता हमारा सभ्यता और हमारा मूल्यवान है. हमारे देश को अच्छा बनाना या बुरा बनान हम लोगों के ही हाथ में है.

अगर आप शिक्षक या माता-पिता यह Post को Read कर रहें है तो आप यह बात हमेशा याद रखिएं अपने बच्चों के प्रति की आप भी कभी बच्चा थें. आप किसी Institute के माध्यम से या किसी अन्य माध्यम से बच्चों का Exam लें रहें है और अगर किसी बच्चा का % कम आता है तो उन्हें सभी के सामने भला-बुरा कह के उन्हें शर्मिंदा नहीं करें. अगर आप ऐसा करते है तो आप सही मायने से एक Teacher नहीं है एक सच्चा Teacher वही होता है जो उस Student के साथ उसकी उम्र अर्थात उनकी उम्र से उन्हें देखते है.

अगर आप उन्हें सभी के सामने शर्मिंदा करते है तो बच्चा या तो पढाई करना छोड़ देगा या फिर आपके पास पढ़ने नहीं आएगा. उन्हें कुछ ऐसे व्यक्ति का उदाहरण दीजिएं कि वो पढाई में पूरी तरह से मन लगा सके. एक दुसरे के साथ उन्हें आगे बढ़ने और कुछ सिखने का मार्ग बताएँ. देखना आपको वो Student अपना God मान लेगा. बस आपको उन्हें सही मार्ग दिखाने कि जरुरत है.


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